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जनाब रफ़ीउल्लाह रफ़ी यूसुफ़पुरी साहब का जन्म 08 सितम्बर 1947 ईसवी को यूसुफ़पुर मंगल बाज़ार में हुआ। शेरो-सुख़न का शौक़ आपको बचपन से ही था शुरुआत में आप नौहागोई के अलावा क़तआत और नज़्म पर तबा आज़माई करते रहे, कभी-कभी गीत और ग़ज़ल की तरफ़ भी मायल होते मगर नज़्म की तरफ़ आप का रुझान कुछ ज़ियादा ही रहा। एक ज़माना आया आप क़व्वालों के पसन्दीदा शायर बनकर उभरे और मक़बूलियत का एक आला मुक़ाम हासिल किया। जनाब रफ़ी यूसुफ़पुरी साहब का शुमार ग़ाज़ीपुर के उन अहम तरीन शोअरा में होता है जिन्होंने अपनी शायरी से ज़बानो-अदब की बेमिसाल ख़िदमत की है।

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Rafi Yusufpuri

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जनाब रफ़ीउल्लाह रफ़ी यूसुफ़पुरी साहब का जन्म 08 सितम्बर 1947 ईसवी को यूसुफ़पुर मंगल बाज़ार में हुआ। शेरो-सुख़न का शौक़ आपको बचपन से ही था शुरुआत में आप नौहागोई के अलावा क़तआत और नज़्म पर तबा आज़माई करते रहे, कभी-कभी गीत और ग़ज़ल की तरफ़ भी मायल होते मगर नज़्म की तरफ़ आप का रुझान कुछ ज़ियादा ही रहा। एक ज़माना आया आप क़व्वालों के पसन्दीदा शायर बनकर उभरे और मक़बूलियत का एक आला मुक़ाम हासिल किया। जनाब रफ़ी यूसुफ़पुरी साहब का शुमार ग़ाज़ीपुर के उन अहम तरीन शोअरा में होता है जिन्होंने अपनी शायरी से ज़बानो-अदब की बेमिसाल ख़िदमत की है।

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