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लेखक “कुमार विक्रमादित्य” अपनी लेखनी में उन मुद्दों को उठाते है जिसमें पाठक डूबता चला जाता है । सरल भाषा और कथा की जीवंतता इनकी लेखनी को विशिष्ट बनाती है । बेहिचक और बेबाक लेखनी पाठक को इन्हें पढने के लिए मजबूर करता है । आपको इन्हें पढ़ के यह अनुभूति होगी कि इनकी कहानी अपनी कहानी है, मेरी कहानी है, हम सब की कहानी है और किसी न किसी पात्र के रूप में आप अपने को ढालने के लिए मजबूर हो जायेंगे । इनका जन्म चकाचौंध से दूर कोसी नदी के प्रांगण से बीस किलोमीटर दूर गाँव गढ़िया, सहरसा, बिहार में हुआ । प्रारंभिक पढाई गाँव के सरकारी विद्यालय और जिला स्कूल सहरसा में ही हुई, आगे टी एन बी महाविद्यालय, भागलपुर से पढने के बाद उच्च शिक्षा हेतु बनारस और दिल्ली गए । बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थान से पढने के बावजूद इन्होंने अपना कार्यक्षेत्र जन्मस्थान सहरसा को हीं चुना । इन्होंने दो-दो विषयों से मास्टर डिग्री करने के बाद शिक्षा से बेचलर व मास्टर डिग्री ली और अपने अन्दर छुपी प्रतिभा को कागज़ पर उकेरना शुरू किया । लेखक मैथिली, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में अपनी संवेदना और विचारों को लिखते हैं । अभी तक लेखक के मैथिली में पाँच लघु कथा, अंग्रेजी में एक उपन्यास Rhythm and Rhythm, हिंदी में काव्य ग्रन्थ “मेघलेखा” व उपन्यास “हर हर शूलीन”, कहानी संग्रह “दो आँखें” व “ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली” के अलावे विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कई रचनायें प्रकाशित है ।

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Kumar Vikramaditya

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लेखक “कुमार विक्रमादित्य” अपनी लेखनी में उन मुद्दों को उठाते है जिसमें पाठक डूबता चला जाता है । सरल भाषा और कथा की जीवंतता इनकी लेखनी को विशिष्ट बनाती है । बेहिचक और बेबाक लेखनी पाठक को इन्हें पढने के लिए मजबूर करता है । आपको इन्हें पढ़ के यह अनुभूति होगी कि इनकी कहानी अपनी कहानी है, मेरी कहानी है, हम सब की कहानी है और किसी न किसी पात्र के रूप में आप अपने को ढालने के लिए मजबूर हो जायेंगे । इनका जन्म चकाचौंध से दूर कोसी नदी के प्रांगण से बीस किलोमीटर दूर गाँव गढ़िया, सहरसा, बिहार में हुआ । प्रारंभिक पढाई गाँव के सरकारी विद्यालय और जिला स्कूल सहरसा में ही हुई, आगे टी एन बी महाविद्यालय, भागलपुर से पढने के बाद उच्च शिक्षा हेतु बनारस और दिल्ली गए । बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थान से पढने के बावजूद इन्होंने अपना कार्यक्षेत्र जन्मस्थान सहरसा को हीं चुना । इन्होंने दो-दो विषयों से मास्टर डिग्री करने के बाद शिक्षा से बेचलर व मास्टर डिग्री ली और अपने अन्दर छुपी प्रतिभा को कागज़ पर उकेरना शुरू किया । लेखक मैथिली, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में अपनी संवेदना और विचारों को लिखते हैं । अभी तक लेखक के मैथिली में पाँच लघु कथा, अंग्रेजी में एक उपन्यास Rhythm and Rhythm, हिंदी में काव्य ग्रन्थ “मेघलेखा” व उपन्यास “हर हर शूलीन”, कहानी संग्रह “दो आँखें” व “ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली” के अलावे विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कई रचनायें प्रकाशित है ।

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