Ret ka samandar

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Description

मुझ अकिंचन के दो ग़ज़ल-संग्रह ‘बोलती रोशनाई’ और ‘आईने में चाँद’ को आप सम्मानित पाठकगणों द्वारा अत्यधिक सराहा गया और भरपूर समीक्षायें लिखी गईं जो मेरे लिये किसी पुरस्कार से कम नहीं हैं… अभिभूत हूँ। आपके इसी प्यार दुलार से मेरे अल़्फ़ाज़ उड़ान भरते रहे, चाँद-सितारों से होते हुये वो दूसरे अदृश्य जहाँ को देखने की कोशिश में हर क्षण तसव्वुर के दर पर सजदा करते रहे। आख़िर में हमारी ख़ामोशी की इबादत रंग लायी और हमें ऐसे अनदेखे दृश्य दिखाई पड़ने लगे जो पहले कभी कल्पना में नहीं थे; अब वह पूरी कायनात ज़रा-ज़रा मेरे सामने आती जा रही है। इन्द्रधुनष के सात रंगों में मैं पहले ही डूबी थी, अब तो अनगिनत रंग वादियों में बिखरे पड़े हैं… जिधर निगाह जाती है उधर ही बँध जाती हूँ। इस संग्रह को भी अपनी मुहब्बत से शराबोर करके अपनी पलकों का स्पर्श दीजिए, मैं विनयावनत रहूँगी।

Book Details

Weight 180 g
Dimensions 8.5 × 5.5 × 0.576 in
Edition

First

Language

Hindi

Binding

Paperback

Pages

144

ISBN

9788195304578

Publication Date

2021

Author

Dr. Phoolkali 'Poonam'

Publisher

Anjuman Prakashan